पिंजरा

Image result for cage images

सूरज की किरणें कैद हैं बादलो के पिंजरे में,

है चाँद की रोशनी  भी कैद धूंध के पिंजरे मे,

मझधार मे है वह नौका भवंर के पिंजरे मे उलझा हुआ |

अच्छाईयाँ कैद है; बुराइयों के पिंजरे  में,

जहाँ देखो नजर आए चेहरे पे एक नकाब, क्यों हर

इंसान है कैद अपने सपनों के पिंजरे में?

आकाश मे ऊंची उड़ान भरता, वह बाज़ भी अपने उलझन के पिंजरे मे कैद|

औरो से क्या पूछे जब खुद हूँ, अंधेरे के पिंजरे मे|

पर अभी भी एक आस बाकी है, अभी भी उस पिंजरे से छूपते-छूपते एक किरण की आस बाकी है|

है इंतजार उस दिन का जब पिंजरा तोड़ गगन मे लेंगे ऊँची उड़ान|

जब बिखरेंगे सुनहरे रंग जो थे कभी पिंजरे के अंधकार मे कैद|

जब पिंजरे के उस सन्नाटों को चीरती हुई गूंजेगी एक आवाज़|

 

 

  • Anshu Sinha

B.Tech – 2nd Sem, CSE

%d bloggers like this: